Kshatriya Vansh-kul

सूर्यवंशी कछवाहा क्षत्रिय वंश परिचय एवं सम्पूर्ण शाखाएँ, पढ़िए कछवाहो के गौरवशाली इतिहास को…..

जय माँ भवानी हुकुम ,आपका एक बार फिर से हमारे पेज में स्वागत है। हमने अपनी पिछली पोस्ट में राजपूत समाज के विभिन्न वंशों के विषय में महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा कर रहे थे। 

आज हम उसी कड़ी को एक बार फिर से आगे बढ़ाते हैं आज हम राजपूत समाज के एक और वंश कछवाहा वंश के विषय में आपके साथ विस्तार पूर्वक चर्चा करेंगे। भारत में राजस्थान के साथ साथ अन्य राज्यों में भी काफी अच्छी संख्या है।

आज हम आपको कछवाहा वंश के विषय में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य बताएंगे और उनके विषय में विस्तारपूर्वक चर्चा भी करेंगे तो चलिये शुरु करते हैं.

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कछवाहा वंश इतिहास में प्रसिद्ध क्षत्रिय सूर्यवंशी राजपूत राजवंश की एक (खाप) शाखा ।

कछवाहों की (राजपूतों) इस खाप की उत्पति कहाँ से और कैसे हुई ?

मान्यता की यह कुल राम के पुत्र कुश से उत्पन्न हुवा है। कछवाह वंश अयोध्या राज्य के सूर्यवंशी राजाओ की एक शाखा है। भगवान श्री रामचन्द्र जी के ज्येष्ठ पुत्र कुश से इस वंश (शाखा) का विस्तार हुआ है । अयोध्या राज्य पर कछवाहा वंश का शासन रहा है।

अयोध्या राज्य वंश में ”इक्ष्वाकु” दानी ”हरिशचन्द्र”, ”सगर” (इनके नाम से सगर द्वीप जहाँ गंगासागर तीर्थ स्थल है), पितृ भक्त ”भागीरथ ”, गौ भक्त ”दिलीप ”, ”रघु” सम्राट ”दशरथ”, मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान “रामचंद्र” एवं उनके ज्येष्ठ पुत्र महाराज ”कुश” के वंशधर कछवाहा कहलाये।

कछवाहा वंश की सम्पूर्ण शाखाएँ : 

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देलणोत ,झामावत ,घेलणोत , राल्णोत ,जीवलपोता ,आलणोत (जोगी कछवाहा) , प्रधान कछवाहा , सावंतपोता, खीवाँवात , बिकसीपोता,पीलावत ,भोजराजपोता (राधर का,बीकापोता ,गढ़ के कछवाहा,सावतसीपोता) ,सोमेश्वरपोता,खींवराज पोता, दशरथपोता,बधवाड़ा,जसरापोता, हम्मीरदे का , भाखरोत, सरवनपोता,नपावत,तुग्या कछवाहा, सुजावत कछवाहा, मेहपाणी , उग्रावत , सीधादे कछवाहा, कुंभाणी , बनवीरपोता,हरजी का कछवाहा,वीरमपोता, मेंगलपोता, कुंभावत, भीमपोता या नरवर के कछवाहा, पिचयानोत , खंगारोत,सुल्तानोत, चतुर्भुज, बलभद्रपोत, प्रताप पोता, नाथावत, बाघावत, देवकरणोत , कल्याणोत, रामसिंहहोत, साईंदासोत, रूप सिंहसोत, पूर्णमलोत , बाकावत , राजावत, जगन्नाथोत, सल्देहीपोता, सादुलपोता, सुंदरदासोत , नरुका, मेलका, शेखावत, करणावत , मोकावत , भिलावत, जितावत, बिझाणी, सांगणी, शिवब्रह्मपोता , पीथलपोता, पातलपोता।

नोट – कछवाहा वंश की ऐतिहासिक जानकारी काफी विस्तृत है हमने अपने इस पोस्ट में मुख्य पहलुओं पर ही जानकारी दी है।फिर भी कोई महत्वपूर्ण जानकारी छूट गयी है तो हम उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं।

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