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Dhanteras धनतेरस करे यह शुभ कार्य होगी कृपा, धनतेरस कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या हे जानिए।

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दीपावली सुख, धन और समृद्धि का त्योहार माना जाता है। ‘धनवंतरि’ चिकित्सा के देवता भी हैं इसलिए उनसे अच्छे स्वास्थ्य की भी कामना की जाती है। ‘धनतेरस’ शब्द को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।
हिंदी में धन का अर्थ होता है धन और शब्द ‘तेरा’ का अर्थ है तेरह। इस प्रकार धनतेरस के दिन, हिन्दू देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती हैं, जो धन की देवी हैं। धनतेरस से हिंदू लोग दिवाली के बेहद लोकप्रिय त्योहार की शुरूआत करते हैं।
पुराणों के मुताबिक जब देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन हुआ तब समुद्र से चौदह रत्न निकले थे। जिनमें एक रत्न अमृत था।

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भगवान विष्णु देवताओं को अमर करने के लिए ‘धनवंतरि’ के रूप में प्रकट होकर कलश में अमृत लेकर समुद्र से निकले थे। इसलिए ‘धनवंतरि’ की पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

कब मनाया जाता है धनतेरस ?

धनतेरस का पर्व हर साल दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है। हिन्‍दू कैलेंडर के मुताबिक कार्तिक मास की तेरस यानी कि 13वें दिन धनतेरस मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह पर्व हर साल अक्‍टूबर या नवंबर महीने में आता है। इस बार धनतेरस 2 नवंबर को है।
दिवाली पर धनतेरस के दिन देवी लक्ष्मी एवम धन्वंतरी देवता की पूजा की जाती हैं. यह पर्व दीपावली के दो दिन पहले मनाया जाता हैं. लक्ष्मी जी एवम धन्वन्तरी दोनों का जन्म समुद्र मंथन से हुआ था. इस दिन इनके साथ कुबेर देवता एवम यमराज की पूजा की जाती हैं।
कहा जाता हैं इस दिन दक्षिण दिशा में दीप दान करने से अकाल मृत्यु का योग ख़त्म होता हैं. धनतेरस के दिन चांदी एवम अन्य नये बर्तन खरीदने की प्रथा भी हैं, इन सब प्रथाओं के पीछे कई पौराणिक कथायें कही गई हैं.
यह कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की तेरस के दिन मनाई जाती हैं. इस दिन कुबेर, लक्ष्मी, धन्वन्तरी एवम यमराज का पूजा की जाती हैं. यह दिन दीपावली के दो दिवस पूर्व मनाया जाता हैं. इसी दिन से दीपावली महा पर्व की शुरुवात होती हैं. वर्ष 2021 में धनतेरस 2 नवंबर को मनाई जायेगी.

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कार्तिक माह कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को धन्वंतरी देवता का जन्म हुआ था, इनका जन्म समुद्र मंथन से हुआ था और ये अमृत कलश लेकर जन्मे थे, जिसके लिए इतना भव्य समुद्र मंथन किया गया था. इसी समुद्र मंथन से लक्ष्मी जी का भी जन्म हुआ था. धन्वन्तरी के जन्म के कारण ही इसका नाम धनतेरस पड़ा. धन्वंतरी देवो के वैद्य हैं इस कारण इस दिन आयुर्वेद दिवस भी कहा जाता हैं.

धनतेरस की तिथि और शुभ मुहूर्त

इस तिथि की शुरुआत 2 नवंबर को 11.31 AM से होगी और समाप्ति 3 नवंबर को 09:02 AM पर। प्रदोष काल शाम 05:35 से रात 08:11 बजे तक रहेगा। धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम 06:17 PM से रात 08:11 PM तक रहेगा। यम दीपम का समय शाम 05:35 PM से 06:53 PM तक रहेगा।

धनतेरस के दिन खरीदारी करना बर्तन एवम चांदी खरीदने की प्रथा इस प्रकार हे

धन्वंतरी हाथ में कलश लेकर जन्मे थे, चूँकि वह कलश महान अमृत का बर्तन था, इसलिए इस दिन घरों में नये बर्तन खरीदने का भी चलन हैं.

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खासतौर पर इस दिन चांदी खरीदी जाती हैं. इसके पीछे का मान्यता हैं कि इस दिन धन की देवी की पूजा की जाती हैं. यह पूजा धन प्राप्ति के उद्देश्य से की जाती हैं. कहते हैं धन देने से पहले मनुष्य को बुद्धिमता विकसित करना चाहिये. अपने तन मन को शीतल करना चाहिये. इसलिए इस दिन चन्द्रमा जो शीतलता देता हैं का प्रतीक कहे जाने वाली धातु चांदी खरीदी जाती हैं. इस प्रकार धनतेरस के दिन बर्तन एवम चांदी खरीदने की प्रथा हैं. इस प्रकार अब आधुनिक युग में इस दिन मनुष्य को जो भी खरीदना होता है, उसे लक्ष्मी पूजा के महत्व के रूप में खरीदते हैं.

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