History Kuldevi Hindi Stories Destination Status Rochak Rajput Vansh Blogging

जादौन वंश की कुलदेवी | श्री कैला माँ : जिनके दर्शन से होती हे सभी मनोकामनाए पूर्ण

By Vijay Singh Chawandia

Updated on:

राजस्थान के पूर्वी भाग में करौली राज्य यदुवंशी क्षत्रियो की वीर भूमि रही , करौली राजवंश की कुलदेवी के दो तरह के लेख मिलते है । जब यदुवंशी महाराजा अर्जुन देव जी ने 1348 ई. में करौली राज्य की स्थापना की। जादौन वंश की कुलदेवी

तभी उन्होने करौली से उत्तरी दिशा में 2 या 3  कि.मी. की दूरी पर पांचना नदी के किनारे पहाडी पर श्री अंजनी माता का मंदिर बनवा कर अपनी कुलदेवी के रूप में पूजने लगे और अंजनी माता जादौन वंश की कुलदेवी के रूप में पूजित हुई ।।

WhatsApp Group Join Us
Telegram Group Join Now

जादौन वंश की कुलदेवी श्री कैला माँ Jadoun Vansh Kuldevi 

एक लेख यह मिलता है कि करौली राज्य के दक्षिण – पश्चिम के बीच में 23  कि. मी. की दूरी पर चम्बल नदी के पास त्रिकूट पर्वत की मनोरम पहाडियों में सिद्दपीठ जादौन वंश की कुलदेवी श्री कैला देवी जी का पावन धाम है , यहॉ प्रतिवर्ष अधिकाधिक लाखो श्रृदालु माँ के भक्त दर्शनार्थ एकत्रित होते है।

जिस स्थान पर माँ श्री कैला देवी जी का मंदिर बना है वह स्थान खींची राजा मुकुन्ददास की रियासत के अधीन थी वे संभवत चम्बल पार कोटा राज्य की भूमि के स्वामी थे जो गागरोन के किले में रहते थे ,जादौन वंश की कुलदेवी

उन्होने बॉसीखेडा नामक स्थान पर चामुण्डा देवी की बीजक रूपी मूर्ति स्थापित करबाई थी और वो वहा अक्सर आराधना के लिये आते थे , ये बात सम्वत 1207 की है ,एक बार खींची राजा मुकुन्ददास जी अपनी रानी सहित चामुण्डा देवी जी के दर्शनार्थ आये उन्होने कैला देवी जी की कीर्ति सुनी तो माता के दर्शनार्थ आये ,

माता के दर्शनार्थ पश्चात उनके मन में माता के प्रति आगाध श्रृदा बड गयी , राजा ने देवी जी का पक्का मठ बनवाने का उसी दिन निर्माण शुरू करवा दिया जब माता का मठ बनकर तैयार हो गया तो उसके बाद श्री कैला देवी जी की प्रतिमा को मठ में विधि पूर्वक स्थापित करवा दिया ।

कुछ समय बाद विक्रम संवत 1506  में यदुवंशी राजा चन्द्रसेन जी ने इस क्षेत्र पर अपना कब्जा कर लिया तब उसी समय एक बार यदुवंशी महाराजा चन्द्रसेन जी के पुत्र गोपाल दास जी दौलताबाद के युद्द में जाने से पूर्व जादौन वंश की कुलदेवी श्री कैला माँ के दरबार में गये और माता से प्राथना करी कि माता अगर मेरी इस युद्द में विजय हुई तो आपके दर्शन करने के लिये हम फिर आयेंगे ।

जब राजा गोपाल दास जी दौलताबाद के युद्द में विजय हासिल कर के लौटे तब माता जी के दरबार में सब परिवार सहित एकत्रित हुये ।तभी यदुवंशी महाराजा चन्द्रसेन जी ने कैला माँ से प्राथना करी कि हे कैला माँ आपकी कृपा से मेरे पुत्र गोपाल दास को युद्द में विजय हासिल हुई है ।

जादौन वंश की कुलदेवी
आज से सभी यदुवंशी राजपूत अंजनी माता जी के साथ साथ श्री कैला देवी जी को अपनी कुलदेवी ( अधिष्ठात्री देवी के रूप में ) पूजा किया करेंगे , और आज से मैया का पूरा नाम श्री राजराजेश्वरी कैला महारानी जी होगा ( बोल सच्चे दरबार की जय ) तभी से करौली राजकुल का कोई भी राजा युद्द में जाये या राजगद्दी पर बैठे अपनी कुलदेवी श्री कैला देवी जी का आशीर्वाद लेने जरूर जाता है। 

और तभी से मेरी मैया श्री राजराजेश्वरी कैला देवी जी करौली राजकुल की कुलदेवी के रूप में पूजी जा रही है ।। मुझसे कई जादौन राजपूतो ने कहा कि मेरी कुलदेवी श्री कैला देवी जी नही है अंजनी माता जी है ।

कैला माता जाधव / जादौन वंश की कुलदेवी

तो ये बात स्पष्ट करने के लिये में खुद वर्तमान समय में करौली महाराजा कृष्ण पाल जी के परिवार के एक सदस्य श्री छत्रपाल जादौन जी से मिलने के लिये उनके घर गया और इस विषय पर मैने चर्चा की तब उन्होने हमारी समस्या का समाधान किया कि हमारी कुलदेवी अंजनी माता जी भी है और कैला देवी जी भी है।

उन्होने बताया कि करौली के राजा को माता ने स्वप्न में भी ऐ बात कही थी कि मेरी अपने राजकुल की कुलदेवी के रूप में पूजा करो तभी से श्री कैला माँ को पूजते आ रहे है ।। 

अगर मैने जादौन वंश की कुलदेवी श्री कैला देवी जी का कुलदेवी के रूप में जानकारी देने में गलती की हो तो में आप लोगो से और श्री कैला माँ से क्षमा चाहता हूँ । ** Source — बन्टू सिंह राजावत ग्राम – जैतपुरा मढी जिला – भिण्ड

राजपूत वंशो की कुलदेवी से जुड़े अन्य लेख जरूर पढ़े 

  1. सौलंकी वंश की कुलदेवी ( क्षेमकरी/खींवज माता )
  2. तौमर/तँवर वंश की कुलदेवी ( चिल्लाय माता )

Vijay Singh Chawandia

I am a full time blogger, content writer and social media influencer who likes to know about internet related information and history.

Related Post